देश की जनता को बरगलाना इतना आसान क्यों ?
आगरा के फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के गांव कौंरई में इन दिनों ग्रामीणों में खासा आक्रोश व्याप्त है ग्रामीणों द्वारा कानून हाथ में लेकर जिस तरह से सरकारी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है वह बहुत ही दुखद है लेकिन हम यह देखते हैं कि कुछ दिन पूर्व इस गांव में आपसी भाईचारा और सौहार्द व्याप्त था।
लेकिन कुछ मौकापरस्त नेताओं की बातों में आकर ये सीधे-साधे ग्रामीण उद्वेलित हो गये। देखा जाए तो जिस कारण को लेकर नेतागिरी की जा रही है वास्तव में इस तरह की घटनाएं कई बार हुई हैं लेकिन इस बार इस तरह का उग्र रूप बेवजह नहीं हो सकता, देखा जाए तो ग्रामीणों का यह रूप खुद इनका नहीं बल्कि किसी का दिया हुआ है। गांव की शांति को हिंसक रूप देने वाले कोई और नहीं बल्कि किसान हितैषी की दुहाई देने वाले चन्द मौकापरस्त लोग हैं जिन्हें हम आम भाषा में नेता कहते हैं।
बुद्धिजीवी लोग बखूबी जानते हैं कि अगले वर्ष विधान सभा के चुनाव हैं और विधान सभा चुनाव यानि प्रदेश के मुखिया को चुनने का एक माध्यम। यही कारण है कि ये तथाकथित किसान नेता कौंरईं के चौहरे हत्याकांड को एक नया ही रूप देने को आमादा है यदि इन नेताओं की बात मानी गई तो इन भोले भाले किसानों का तो भगवान ही मालिक है। मानते हैं कि एक ही परिवार के चार लोगों की वीभत्स मौत आम इंसान के लिए काफी असहनीय और भयावह होती है रौंगटे खड़े करने वाली इस घटना का पर्दाफाश होना भी बहुत जरूरी है इसके लिए ग्रामीणों का पुलिस के उच्चाधिकारियों से मिलना और शांतिपूर्वक तरीके से अपनी बात मनवाने का संवैधानिक अधिकार है।
लेकिन स्वयंभू किसान नेता होने की दुहाई देने वाले ये मौकापरस्त क्यों भूल जाते हैं कि राष्ट्रीय मार्ग और रेलवे मार्ग को अवरूद्ध करना अथवा कोई क्षति पहुंचाना कानूनन जुर्म है। इन स्वयंभू किसान नेताओं द्वारा जनता को बरगलाकर अगले विधानसभा चुनाव में अपनी जगह बनाने की एक चाल है जिसे जनता को समझना चाहिए।
नोट- उपरोक्त विचार 2011 में आगरा के फतेहपुर सीकरी में हुई हिंसा पर आधारित हैं जो ये विचार उसी वक्त व्यक्त किये गये थे किन्तु कृतिदेव फोंट में आने के कारण अपठनीय थे...अब इस लेख को पठनीय बनाया गया है।
नोट- उपरोक्त विचार 2011 में आगरा के फतेहपुर सीकरी में हुई हिंसा पर आधारित हैं जो ये विचार उसी वक्त व्यक्त किये गये थे किन्तु कृतिदेव फोंट में आने के कारण अपठनीय थे...अब इस लेख को पठनीय बनाया गया है।
No comments:
Post a Comment