Tuesday, 26 March 2019

मेरी बेटी...शक्तिमान

ये मेरे हाथ में मेरी सबसे अमूल्य धरोहर है जिसे मुझे सहेजना है संवारना है नित नई-नई ऊंचाईंयों तक पहुंचाना है पर ये ऊंचाईयां इतनी हों कि जहां ये हम सबको देखे हमारे सुख से लेकर हमारे किसी भी मर्म को समझ सके...और जरूरत होने पर हमारी हर एक हलचल को समझे और अपना हाथ आगे बढ़ाकर बोले- कोई बात नहीं पापा, कोई नहीं मम्मा मैं हूं न- आपकी बेटी 

आज इसकी हर एक मुस्कान पर मैं सदके जाता हूं...इसकी एक मुस्कराहट मानो फूलों की बारिश है....
ये मेरी बेटी मानो सर्वशक्तिमान (ईश्वर, अल्लाह, वाहे गुरू, गॉड और बुद्धा) की सिफारिश है...
इसके आने से आई जिंदगी में मेरी बहार...इसके आने से मैं उठाने लगा अपने कंधों पर ज़िम्मेदारियों का भार...मेरा एक ही सपना है हो ज़रूर साकार...वो ये कि मेरी बेटी और संसार की अनेक बेटियां...नूर बनकर छा छाये इस जहां में.. हर कोई कहे बेटा-बेटी एक समान....मेरी बेटी भी है शक्तिमान
 

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